नोएडा में पद्मश्री दया प्रकाश सिन्हा के निधन से साहित्य और रंगमंच जगत में शोक की लहर है। उन्होंने अपने जीवन में साहित्य और रंगमंच को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पद्मश्री सहित कई सम्मान प्राप्त करने वाले दया प्रकाश सिन्हा के नाटक सामाजिक और सांस्कृतिक सरोकारों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करते थे।

पद्मश्री दया प्रकाश सिन्हा (फाइल फोटो)
हिंदी साहित्य के वरिष्ठ नाटककार और पद्मश्री सम्मानित दया प्रकाश सिन्हा का शुक्रवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे नोएडा सेक्टर-26 स्थित उनके निवास पर निधन हो गया। 91 वर्ष की आयु में उनका यह निधन साहित्य और रंगमंच जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। दया प्रकाश सिन्हा को उनके प्रसिद्ध नाटक ‘सम्राट अशोक’ के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार 2021 से सम्मानित किया गया था। उनके निधन की खबर से साहित्य और रंगमंच समुदाय में गहरा शोक व्याप्त है।
कवि रहीम दास के जीवन पर लेख लिख रहे थे दया प्रकाश सिन्हा
वे पिछले दो महीनों से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके स्टाफ सदस्य रवि ने बताया कि लेखक दया प्रकाश सिन्हा किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित नहीं थे, लेकिन हाल के दिनों में वे काफी कमजोर महसूस कर रहे थे। उनके परिवार में दो बेटियां हैं, जिनमें से एक अमेरिका में रहती हैं।
वरिष्ठ लेखक दया प्रकाश सिन्हा का अंतिम संस्कार शनिवार दोपहर करीब 12 बजे सेक्टर-94 स्थित श्मशान स्थल पर किया जाएगा। दया प्रकाश सिन्हा जीवन के अंतिम दिनों तक लेखन कार्य में सक्रिय रहे। हाल ही में वे कवि रहीम दास के जीवन पर आधारित एक लेख पर काम कर रहे थे।
संगीत नाटक अकैडमी के पूर्व अध्यक्ष रहे दया प्रकाश सिन्हा
1935 में उत्तर प्रदेश के कासगंज में जन्मे दया प्रकाश सिन्हा अवकाशप्राप्त आईएएस अधिकारी थे, जिन्होंने हिंदी साहित्य, रंगमंच और नाट्य निर्देशन के क्षेत्र में अमूल्य योगदान दिया। वे उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी और ललित कला अकादमी के अध्यक्ष रहे, साथ ही फिजी में भारत के पहले सांस्कृतिक सचिव के रूप में भी कार्य किया।
कला और साहित्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड, लोहिया सम्मान और हिंदी अकादमी का साहित्यकार सम्मान सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था।
1993 में भारत भवन, भोपाल के निदेशक पद से सेवानिवृत्त होने के बाद भी वे साहित्य सृजन में सक्रिय रहे। साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ. चंद्रशेखर कम्बार ने शोक व्यक्त करते हुए कहा, “सिन्हा जी का निधन हिंदी रंगमंच के लिए अपूरणीय क्षति है। उनकी रचनाएँ आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेंगी।”
उनके निधन से साहित्य और रंगमंच जगत में गहरा शोक व्याप्त है। अंतिम संस्कार की तैयारियाँ परिजनों द्वारा की जा रही हैं।
