नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट देश का पहला मल्टी-मॉडल हब बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसे सड़क, रेल और रैपिड रेल नेटवर्क से जोड़ा जाएगा, जिससे यात्रियों को सुविधाजनक और तेज़ परिवहन विकल्प मिलेंगे। यह कनेक्टिविटी न केवल यात्रा समय कम करेगी बल्कि क्षेत्र के विकास और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति देगी।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (एनआईए) देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट होने के साथ-साथ मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी का केंद्र बनने जा रहा है। एकीकृत परिवहन व्यवस्था के तहत यह देश के कुछ चुनिंदा एयरपोर्ट्स में शामिल होगा, जहां सड़क, बस और रेल — तीनों माध्यमों से सीधी कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी।
इससे दिल्ली-एनसीआर के साथ-साथ आगरा, अलीगढ़, मथुरा, मेरठ और हरियाणा के कई शहरों से यात्रियों को एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए सुविधाजनक और तेज़ विकल्प मिलेंगे। यात्रियों की यात्रा समय को कम करने के लिए नए लिंक एक्सप्रेसवे भी बनाए जा रहे हैं। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आगामी उद्घाटन और संचालन को देखते हुए यह कनेक्टिविटी क्षेत्र के विकास और यात्रियों की सुविधा, दोनों के लिए बेहद अहम साबित होगी।
हर दिशा से बेहतर सड़क कनेक्टिविटी
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को यमुना एक्सप्रेसवे से सीधा जोड़ा गया है। साथ ही, दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से एयरपोर्ट को जोड़ने के लिए 31 किलोमीटर लंबी लिंक रोड तैयार की गई है। यह रोड बल्लभगढ़ से शुरू होकर यमुना एक्सप्रेसवे पर बने इंटरचेंज के माध्यम से नोएडा एयरपोर्ट तक पहुंचती है, जिससे हरियाणा की सीधी कनेक्टिविटी एयरपोर्ट से स्थापित हो गई है।
इसके अलावा, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से एयरपोर्ट को जोड़ने के लिए एनएचएआई द्वारा इंटरचेंज का निर्माण तेज़ी से किया जा रहा है। इसके पूरा होने पर गाजियाबाद, मेरठ, पलवल और सोनीपत से एयरपोर्ट तक पहुंचना और अधिक सुविधाजनक हो जाएगा। औद्योगिक और मालवाहक वाहनों के लिए एयरपोर्ट के उत्तर और पूर्व दिशा में आठ किलोमीटर लंबी सड़क लगभग तैयार है, जबकि 60 मीटर चौड़ी सड़क को भी बेहतर कनेक्टिविटी के लिए विकसित किया जा रहा है।
एयरपोर्ट को रेल और रैपिड रेल नेटवर्क से भी जोड़ा जाएगा
दिल्ली से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) परियोजना प्रस्तावित है, जिसका डीपीआर राज्य सरकार पहले ही तैयार कर चुकी है। इस परियोजना के माध्यम से एयरपोर्ट को दिल्ली और गाजियाबाद से सीधी रेल कनेक्टिविटी मिलेगी। इसके अलावा, चोला-रुंधी रेल लाइन पर रेल मंत्रालय विचार कर रहा है, जिससे रेल संपर्क और मजबूत होगा।
एयरपोर्ट को दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर से भी जोड़ा जाएगा, जिसके लिए एयरपोर्ट स्टेशन को स्वीकृति मिल चुकी है। इस हाई-स्पीड रेल के माध्यम से यात्री मात्र 21 मिनट में दिल्ली से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक पहुंच सकेंगे।
यात्री इलेक्ट्रिक बसों के माध्यम से एयरपोर्ट से अपने अंतिम गंतव्य तक आसानी से पहुंच सकेंगे।
एयरपोर्ट को आसपास के शहरों और मेट्रो नेटवर्क से सुचारू रूप से जोड़ने के लिए विभिन्न परिवहन निगमों के साथ समझौते किए गए हैं। उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान के बीच अंतरराज्यीय बस सेवाओं के लिए भी अनुबंध या सहमति बन चुकी है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण संयुक्त रूप से 500 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन करेंगे, जिसके लिए एक विशेष प्रयोजन वाहन (एसपीवी) गठित किया जाएगा।
इन व्यवस्थाओं से यात्रियों को अपने अंतिम गंतव्य तक पहुंचने में आसानी होगी। इसके साथ ही एयरपोर्ट पर महिंद्रा लॉजिस्टिक्स, उबर, रैपिडो और मेक माई ट्रिप जैसी कंपनियां कैब सेवाएं प्रदान करेंगी, जबकि ओला के साथ अनुबंध प्रक्रिया अंतिम चरण में है। यात्री मोबाइल ऐप के माध्यम से कैब बुक कर सकेंगे, किराया देख सकेंगे और लाइव ट्रैकिंग की सुविधा भी प्राप्त करेंगे, जिससे यात्रा अधिक आरामदायक और सुरक्षित बनेगी।
इसके अलावा यात्रियों के लिए सेल्फ-ड्राइव या ड्राइवर सहित कार किराए पर लेने की सुविधा भी उपलब्ध होगी, जिसके लिए संबंधित कंपनियां तैयार हैं।
